Tue05052015

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जमाते इस्लामी नेता कमरुज्जमां को फांसी

fashi-ढाका। बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी पार्टी के शीर्ष नेता मोहम्मद कमरुज्जमां को ढाका की जेल में फांसी दे दी गई है। कमरुज्जमां को 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई के दौरान युद्ध अपराध का दोषी पाया गया था। युद्ध अपराध के लिए बने ट्राइब्यूनल ने मई 2013 में कमरुज्जमां को नरसंहार का दोषी करार दिया था। 62 वर्षीय कमरुज्जमां को कम से कम 120 निहत्थे किसानों की हत्या का दोषी भी ठहराया गया। उन्होंने बांग्लादेश की राष्टपति से क्षमादान मांगने से इनकार कर दिया था। बांग्लादेश में युद्ध अपराध में फांसी की सज़ा पाने वाले वह दूसरे व्यक्ति हैं। 1971 की लड़ाई में 30 लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे। 

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हां, अंकिता और मैं शादी कर रहे हैं-करण

haaये है मोहब्बतें के रमन भल्ला यानि करण पटेल अभिनेत्री अंकिता भार्गव के साथ जल्दी ही परिणय सूत्र में बंधने वाले हैं। करण का नाम काम्या पंजाबी के साथ जोड़ा जाता रहा है लेकिन उन दोनों ने अपने रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं किया और इसे सिर्फ अच्छी दोस्ती का नाम देते रहे। करण और अंकिता की शादी का शुभ मुहूर्त आने ही वाला है। इस खबर की पुष्टि करते हुए करण ने कहा, ‘हां, अंकिता और मैं शादी कर रहे हैं और यह मेरी जिंदगी का एक नया अध्याय है। मैं इसका बेताबी से इंतजार कर रहा हूं और उस लड़की से शादी के लिए बेताब हूं जो न सिर्फ एक खूबसूरत साथी है बल्कि मेरे लिये सब कुछ है।’ दिलचस्प है कि अंकिता के पिता अभय ये है मोहब्बतें में करण के आॅनस्क्रीन ससुर मिस्टर अय्यर की भूमिका निभा रहे हैं और अब वह उनके असली ससुर भी होंगे। इन दोनों को मिलाने वाले और कोई नहीं बल्कि शो में करण के भाई रोमी की भूमिका निभाने वाले एली गोनी हैं।

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लिंक फेल होने से रुकी आठ हजार उपभोक्ताओं की सब्सिडी

भोपाल गैस सब्सिडी के लिए एक ओर तो उपभोक्ताओं को यह कहा जा रहा है कि वे अपने कनेक्शन बैंक खातों से लिंक कराएं, दूसरी ओर कई उपभोक्ताओं की सब्सिडी बैंक में रुक रही है। बताया जाता है कि मध्यप्रदेश में करीब 55 हजार से ज्यादा और भोपाल में करीब 8 हजार उपभोक्ता ऐसे हैं जिनकी गैस सब्सिडी बैंकों की लिंक फेल होने से अटक गई है। इनमें सर्वाधिक उपभोक्ता स्टेट बैंक आॅफ इंडिया और बैंक आॅफ इंडिया से जुड़े हैं। सब्सिडी आने में देरी से कई उपभोक्ताओं को लग रहा है कि उनका पैसा नहीं मिल पाएगा, लेकिन सरकार की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर आॅन एलपीजी (डीबीटीएल) स्कीम के तहत यह पैसा मिलना तय है। पेट्रोलियम कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि लिंकेज फेल होने से कुछ समय के लिए सब्सिडी अटक सकती है।

ये जानना बेहद जरूरी

उपभोक्ताओं के लिए यह जानना भी जरूरी है कि उन्होंने कहां-कहां आधार कार्ड दिया है। यदि उनके एक से अधिक बैंक खाते हैं और उन्होंने सभी बैंकों में आधार कार्ड दिया है तो उनका कनेक्शन उस बैंक खाते से लिंक होगा,जहां उन्होंने अंत में आधार कार्ड दिया है।

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ओला की दस्तक बनी माय कैब की फजीहत

भोपाल राजधानी में ओला कैब की लांचिंग के बाद बीसीएलएल (भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड) की माय कैब की बुकिंग पर असर पड़ने लगा है। कुछ ही दिनों में इस रेडियो कैब की 30 से 35 फीसदी की बुकिंग कम हुई है। पहले रेडियो कैब में रोजाना 250 से 300 बुकिंग आती थीं। लेकिन इन दिनों घटकर 150 से 200 रह गई है। इसकी बड़ी वजह ओला कैब के सस्ते रेट को बताया जा रहा है। मेट्रो टैक्सी, मायकैब के बाद आई ओला कैब से प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। इससे लोगों के विकल्प बढ़ गए हैं और इसका सीधा फायदा कस्टमर को मिल रहा है। जवाहर चौक स्थित माय कैब डिपो में मंगलवार को ज्यादातर कैब खड़ी रहीं। जबकि बीसीएलएल अधिकारियों का मानना है कि क्वालिटी और विश्वसनीयता के मामले में इस रेडियो कैब का कोई मुकाबला नहीं है।

यह है कैब की हकीकत

रेडियो कैब का संचालन छह माह पहले शुरू हुआ था। इसमें सभी 100 कारें नई स्विट डिजायर मॉडल की हैं। जबकि ओला कैब में मारूति,टाटा,फोर्ड कंपनी की सेडान और मिनी कारें हैं। इसमें 250 कारें अनुबंधित की गई हैं। इनमें से कई कारें पुरानी हो चुकी हैं। माय कैब की सुविधा शहर से बाहर जैसे इंदौर, उज्जैन, सागर, जबलपुर, पचमढ़ी आदि के लिए भी हैं। जबकि ओला कैब सिर्फ भोपाल में ही सेवाएं दे रही है । 

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संस्कृति की निराली छटा

ग्वालियर की उद्भव संस्था केवल एक संस्था नहीं बल्कि नवोदित कलाकारों के लिए एक पूरी पाठशाला है, जहां उन्हें निखारा और तराशा जाता है। ग्वालियर में स्थित इस संस्था की स्थापना सांस्कृतिक और क्रीड़ा संस्थान के रूप में 24 सितंबर 1996 में तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री श्रीमंत माधवराव सिंधिया के मार्गदर्शन में हुई थी। वर्तमान में उनकी इस परंपरा को उनके बेटे और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया निभा रहे हैं, जो न केवल संस्था को मार्गदर्शन देते हैं, बल्कि सक्रिय रूप से इसका हिस्सा बने हुए हैं।

अनोखा मंच

इस संस्था का मुख्य उद्देश्य भारतीय कला और संस्कृति का सहेजना और नए कलाकारों को मंच देना है। इसी को ध्यान में रखकर संस्था काम करती है। संस्था इन कलाकारों को न केवल राष्टÑीय बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी नए रूप में प्रस्तुत करती है। यहां कलाकारों की कला को आंका और साधा जाता है। यह नृत्य का अनोखा मंच है। बात ग्वालियर की करें और तानसेन की नगरी में गायन की बात न हो यह संभव नहीं।

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