10-12-2018 09:11:am
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भोपाल। नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी (एनएलआईयू) में हुए डिग्री के फर्जीवाड़े में डेढ़ सौ स्टूडेंट्स और बर्खास्त रजिस्ट्रार के अलावा 10 अन्य प्रोफेसर और अधिकारी शक के घेरे में आ गए हैं। इस मामले में हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय गोहिल ने पांच पूर्व रजिस्ट्रारों, दो दर्जन से अधिक प्रोफेसरों व अधिकारियों के बयान दर्ज कर लिए हैं। यह रिपोर्ट अगले सप्ताह पेश की जा सकती है। एनएलआईयू जनरल काउंसिल (जीसी) की आशंका सच साबित होती दिख रही है। दरअसल, बर्खास्त असिस्टेंट रजिस्ट्रार रंजीत सिंह द्वारा दस फेल स्टूडेंट्स को फर्जीवाड़ा कर डिग्री देने का मामला साबित होने के बाद जनरल काउंसिल ने अन्य छात्रों की जांच करने के आदेश दिए थे। इसमें यह साबित हो चुका है कि फर्जीवाड़े का मास्टर माइंड एआर रंजीत सिंह है। वहीं इस फर्जीवाड़े में एआर सिंह के अलावा करीब आठ से दस प्रोफेसर, अधिकारियों और कर्मचारियों के शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं। मास्टर माइंड होने के कारण एआर सिंह के चारों तरफ प्रोफेसर, अधिकारी व कर्मचारी बने रहते थे। वह इतनी सफाई से कार्य कर विद्यार्थियों को पास कराने का कार्य करते थे कि वरिष्ठ अधिकारियों को संदेह तक नहीं हो पाता था। हाईकोर्ट के पूर्व जज अभय कुमार गोहिल जांच रिपोर्ट में पूर्व रजिस्ट्रार पाण्डेय के बयान भी दर्ज कर चुके हैं।

20 साल से चल रहा था फर्जीवाड़ा

जांच अधिकारी जस्टिस गोहिल 20 साल से चल रहे फर्जीवाड़े की जांच कर रहे हैं। इसमें कई अधिकारी एनएलआईयू को छोड़कर दूसरे संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस दौरान कई प्रोफेसर और रजिस्ट्रार एनएलआईयू को अलविदा कह चुके हैं। इसलिए जांच अधिकारी गोहिल ने दो दर्जन टीचिंग स्टॉफ मेंबर, पूर्व रजिस्ट्रार अनिल चौबे, आरकेएस गौतम, सीएम गर्ग, चंद्रकांता गर्ग को नोटिस देकर बयान देने के लिए तलब किया है।

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