10-12-2018 08:13:pm
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जबलपुर। वर्ष 2023 में कृषकों की आय बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा कवायद की जा रही है। इसके लिए कृषि क्षेत्र में नए अनुसंधान और कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों ने ज्वार की ऐसी प्रजाति विकसित की है जिससे जैविक र्इंधन बनाया जा सकेगा। साथ ही ज्वार के मीठे तने को पौष्टिक चारे के रूप में मवेशी को खिला सकेंगे। अभी जो बीज तैयार किया गया है उसे और विकसित कर हाईब्रिड बनाया जा रहा है। हैदराबाद की इंटरनेशनल क्रॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर इरिड ट्रोपिक (आइटीआरआईएसएटी) संस्था ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विवि से कोलाबरेट कर प्राइमरी ट्राइल में ज्वार की ऐसी प्रजाति विकसित की है, जिससे जैविक र्इंधन का निर्माण हो सके और वह किसानों के लिए अधिक मुनाफा देने वाली भी हो।

तने में चीनी 17 फीसदी

ज्वार के तने में सुगर कंटेट 17 फीसदी तक पाया गया है। ज्वार के तने में मिठास अधिक होने के कारण यह मवेशियों के पौष्टिक चारे के रूप में उपयोग में लाया जा सकेगा। एचएस-28 प्रजाति से जैविक र्इंधन बनाया जा सकेगा। ऐसा प्रयोग विदेशों में किया जा चुका है। इसलिए भारत में भी इस पर तेजी से काम किया जा रहा है। नमी वाले क्षेत्रों में प्रयोग सफल इस उन्नत कृषि तकनीक पर आधारित इस प्रजाति की ट्राइल मालवा क्षेत्र से ली गई क्योंकि वहां तापमान महाकौशल, चंबल अंचल की तुलना में कम रहता है। इतरीसेट संस्था ने इस प्रजाति को विकसित करने के लिए जो मेटेरियल दिया वह कम होने के कारण कृषि वैज्ञािनक परेंट मैटेरियल से ज्वार के बीज को मल्टीप्लाई कर उसे हाईब्रिड बना रहे हैं। यह प्रयोग में भी शुरू किया गया है।

ऐसे तैयार की हाईब्रिड ज्वार

इस किस्म को तैयार करने के लिए मीठी ज्वार व चारे की एक अन्य किस्म की क्रॉस ब्रीडिंग कराई गई। क्रॉस ब्रीडिंग में मीठा ज्वार के ब्रिक (जो द्रव्य है जो किसी उपज को मीठा बनाता है, गन्ने में यह सबसे ज्यादा होता है) को चारे वाली ज्वार में लाया गया। इस तरह एक ऐसा नया बीज मिला जो अधिकतम मीठा होने के साथसाथ् ा भारी मात्रा में चारा व सामान्य मात्रा में उपज देने में सक्षम है। प्रयोग के लिए अधिकतम मीठी ज्वार के जिस बीज का उपयोग इस किस्म को तैयार करने के लिए किया गया है, उसमें शर्करा रस तो 17 फीसदी तक रहता था, लेकिन फसल 150 दिन में तैयार हो पाती थी। चारा व उपज भी बहुत कम मिलती थी।

अधिक लंबी होगी फसल

आरवीआईसीएचएस-28 ज्वार की कई विशेषताएं हैं। सूखे क्षेत्र में इस हाईब्रिड किस्म से किसान को ज्वार की अन्य किस्मों की तुलना में लगभग डेढ़ गुना और मीठा चारा मिलेगा। कारण यह है कि इसकी लंबाई लगभग 15 फीट तक होती है। यह 86 दिन में फलने-फूलने की स्टेज पर आ जाएगी। प्रति हेक्टेयर 680 क्विंटल हरा व मीठा चारा मिलेगा।

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