10-12-2018 08:14:pm
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जबलपुर प्रदेश भर में कुपोषण मिटाने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केन्द्रों को सौंपी गई है। इसके लिए महिला बाल विकास विभाग भले ही अनेक कार्यक्रम संचालित कर रही हो, गंभीरता से कार्य कर रही हो, लेकिन जिले के अधिकारी इन सब पर पलीता लगा रहे हैं। गौरतलब है कि शहरी क्षेत्रों में सतत् निगरानी रखी जाती है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति गड़बड़ ही बनी हुई है। जिले के सिहोरा-कुंडम ब्लॉक में स्थिति चिंताजनक है यहां सुपोषण लाने में अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है।

की गई त्रैमासिक समीक्षा

महिला बाल विकास विभाग ने अपनी त्रैमासिक समीक्षा में उन जिला-ब्लॉक प्रमुखों को फटकार लगाई है जहां पर सुपोषण लाने में लापरवाही बरती गई है इसमें जबलपुर जिले के सिहोरा- कुंडम भी शामिल हैं।

यहां हुए शत-प्रतिशत कार्य

राज्य महिला बाल विकास विभाग के मुताबिक दतिया जिले में सुपोषण कार्यक्रम को लेकर गंभीरता बरती गई है और यही नतीजा है कि दतिया में योजनाओं के तहत शत-प्रतिशत कार्य किया गया।

इन सेक्टरों में कम कार्य

कुंडम ब्लॉक के घुघरा 87.50, सूपावारा 80.00 और तिलसानी सेक्टर में 84 प्रतिशत ही गोद भराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम आयोजित किए गए इसी तरह सिहोरा में भी सिर्फ 90 प्रतिशत ही कार्यक्रम आयोजित किए गए।

नहीं दे पा रहे जवाब

महिला बाल विकास विभाग कमिश्नर ने समीक्षा में पाया है कि सुपोषण लाने में अधिकारियों की सांसें फूल रही है, अनेक महत्वकांक्षी योजनाएं संचालित होने के बावजूद कुपोषण दूर कर पाने में अधिकारी फिसड्डी साबित हो रहे हैं। प्रदेश के सभी जिलों की तुलना करें तो दतिया जिले को छोड़कर सभी जिलों से 100 प्रतिशत सुपोषण लाने का फरमान जारी किया गया है।

ये हैं सुपोषण योजना का उद्देश्य

शासन द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य है कि आर्थिक तंगी के चलते कोई भी बच्चा, किशोरकिशोरी कुपोषित न रह जाएं जिससे सभी का समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास हो सके। साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी इस योजना से लाभान्वित किया जाता है ताकि जच्चा एवं बच्चा दोनों ही स्वस्थ्य रहें।

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