10-12-2018 08:13:pm
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इंदौर सम्पत्तिकर, स्वास्थ्य कर, शिक्षा कर से लेकर दीगर मामलों में नगर निगम ने 700 करोड़ का बहीखाता बनाया है, लेकिन उगाही 500 करोड़ की होगी। 200 करोड़ राजस्व न आने के पीछे तर्क राजनीतिक हस्तक्षेप से लेकर देनदारों की जेब खाली है। निगम अगले साल 95 फीसदी उगाही का लक्ष्य रखेगा। निगम को सम्पूर्ण शहर में जल व सम्पत्ति कर टैक्स के रुप में 700 करोड़ प्रतिवर्ष राशि वसूलना चाहिए। जनप्रतिनिधियों के दबाव-प्रभाव और एआरओ (सहायक राजस्व अधिकारी) की निष्क्रियता के चलते हर बार लक्ष्य में 200 करोड़ खाते में कम आते हैं। खर्चे निरंतर बढ़ते जा रहे हैं और राजस्व में वृद्धि नहीं हो पाती। लोक अदालत के माध्यम से वसूली की कोशिश की जाती है। अधिक से अधिक बकायादारों को बुलाने छूट देने का प्रावधान भी रखा जाता है। अपेक्षाकृत वसूली निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाती। पिछले साल पूर्व निगमायुक्त मनीषसिंह के कड़े कदम उठाने से लक्ष्य 436 करोड़ रुपए तक पहुंच गया था। लक्ष्य को आगे बढ़ाने का जिम्मा निगम कमिश्नर आशीषसिंह ने लिया है।

यहां कोई नहीं आता

शहर में राजस्व वसूली के लिए निगम ने सभी 19 जोनों पर एआरओ पदस्थ कर रखे हैं। ये एआरओ अपने-अपने क्षेत्र में टारगेट पर काम करते हैं। जोन क्रमांक 6 सुभाष नगर और जोन क्रमांक 9 पंचम की फेल में एआरओ नहीं आना चाहते। कोई आता भी है तो वह एक-दो माह में ट्रांसफर करा लेता है। बताते हैं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के बेजा दबाव में एआरओ काम नहीं करते और वसूली लक्ष्य में पिछड़ जाते हैं।

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