10-12-2018 08:13:pm
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इंदौर मप्र में औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार तो तेजी से हुआ, लेकिन प्रदेश में कुशल कामगारों की संख्या दिनोदिन घट रही है। यही कारण है यहां के औद्योगिक क्षेत्र अन्य प्रदेशों के स्टूडेंट्स को नौकरी के लिए तरजीह दे रहे हैं, जबकि हमारे प्रदेश के स्टूडेंट्स नौकरी के लिए खासे परेशान हैं। प्रदेश में स्किल्ड कामगारों की कमी की हालत यह है कि एक स्किल्ड कामगार को तो कंपनी शुरूआती दौर में 10 से 12 हजार रु. प्रतिमाह दे रही जबकि इंजीनियर को पांच से 6 हजार रुपए में नौकरी पर रखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश भर में इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या दिनोदिन बढ़ती जा रही है, लेकिन आईटीआई, पॉलिटेक्निक जैसे संस्थान काफी कम हैं। अगर हम शहर की ही बात करें, तो इंदौर में ही 50 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, लेकिन आईटीआई केवल एक है, वहीं पॉलिटेक्निक भी एक है। जानकारों के मुताबिक 60 वर्कर्स पर एक इंजीनियर की जरूरत होती है, लेकिन आज आलम यह है कि 60 इंजीनियर पर एक वर्कर है। जानकारों के अनुसार, इस कारण उद्योग या तो खुद ट्रेनिंग देकर वर्कर तैयार कर रहे हैं या फिर अन्य प्रदेशों के लोगों को नौकरी पर रख रहे हैं।

आम कोर्स ही हो रहे हैं संचालित -जानकारी के अनुसार, प्रदेश में जितने भी इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, उनमें ऐसे कोर्सेस नहीं है, जिससे उद्योगों को जरूरत के अनुसार कर्मचारी मिल सकें। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश के ज्यादातर इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिविल, कंप्यूटर साइंस जैसे ही कोर्स हैं, जबकि आज जरूरत रोबोटिक इंजीनियरिंग, जेनेटिक साइंस, मेकोट्रॉनिक इंजीनियरिंग, फूड प्रोसेसिंग जैसे कोर्सेस की है, जो हमारे प्रदेश और शहर के कॉलेजों में नहीं पढ़ाए जाते।

बुनियादी सुविधाओं की कमी

हमारे प्रदेश में जितने भी आईटीआई संस्थान हैं, उनमें बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी है। न तो वह नई तकनीक पर काम कर रहे हैं और न ही उनके पास उद्योगों की जरूरत के हिसाब से उपकरण हैं। इसके साथ ही यहां पर पुराने कोर्सेस संचालित हो रही हैं, जिनकी उपयोगिता अब नहीं रही है।

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