10-12-2018 08:12:pm
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भोपाल। प्रदेश में अब सरकारी विभागों में केवल जीएसटी में रजिस्टर्ड कारोबारियों और सप्लायर्स से ही सामग्री की खरीदी होगी। साथ ही जीएसटी में रजिस्टर्ड ठेकेदारों से काम कराए जाने के लिए कहा गया है। इस संबंध में राज्य शासन ने सभी सरकारी विभागों, निगमों, उपक्रमों और संस्थाओं को आदेश जारी कर दिए हैं। शासन ने इस नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में एक जुलाई 2017 से जीएसटी लागू हुआ है। मालूम हो कि हर साल इन विभागों द्वारा कारोबारियों से बड़े स्तर पर खरीदी होती है, लेकिन देखने में आया है कि ये विभाग और उपक्रम ऐसे कारोबारियों से सामग्री की खरीदी कर रहे हैं, जिनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं है, जबकि ये कारोबारी सरकारी विभागों और संस्थाओं से जीएसटी की वसूली कर रहे हैं, लेकिन वाणिज्य कर विभाग को विभागों से वसूले गए जीएसटी का भुगतान नहीं कर रहे हैं। विभाग ने ऐसे कई मामले पकड़े हैं। कारोबारी और सप्लायर्स की तरह सरकारी विभागों और संस्थाओं में विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्य ठेकेदारों से कराते हैंं। इनमें से ठेकेदारों का जीएसटी में रजिस्टेÑशन नहीं है। ये लोग भी सरकारी विभागों और संस्थाओं से जीएसटी की वसूली कर लेते हैं, लेकिन उसका भुगतान वाणिज्यिक कर विभाग को नहीं करते हैं। मप्र माल और सेवाकर अधिनियम की धारा 51 में स्त्रोत पर कटौती के प्रावधान है किंतु अभी वे प्रभावशील नहीं है। सरकार ने कहा है कि राजस्व संग्रहण की दृष्टि से यह आवश्यक हो गया है कि शासकीय विभागों, उपक्रमों, निगम और संस्थाओं को माल एवं सेवाओं की जाने वाली आपूर्ति की जानकारी वाणिज्यिक कर विभाग को निरंतर प्राप्त होती रहे। इस अधिनियम की धारा 150 में सूचनाएं उपलब्ध कराए संबंधी प्रावधान भी लागू किए गए हैं।

हर तिमाही में मंगाई जानकारी

शासन ने आदेश जारी कर कहा है कि इन बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि माल और सेवाओं की आपूर्ति ऐसे कारोबारियों से प्राप्त की जो जीएसटी में पंजीकृत हो। इसके अलावा एक जुलाई 2017 से 31 मार्च 2018 तक की अवधि के लिए एकजाई और एक अप्रैल 2018 से प्रत्येक तिमाही के लिए माल व सेवाओं की आपूर्ति एवं भुगतान की जानकारी वाणिज्यक कर विभाग को अधिकारियों को दी जाएं।

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