10-12-2018 08:12:pm
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नई दिल्ली। देश में सड़कों के गड्ढे आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं। गुरुवार को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान चिंता जताई है। साल 2013-2017 के बीच सड़कों पर गड्ढों के कारण 14,926 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछले पांच वर्ष में सड़कों पर हुए गड्ढों के कारण मरने वालों की संख्या सीमा पर या आतंकवादियों द्वारा की गई हत्याओं से ज्यादा है। पीठ ने कहा कि 2013 से 2017 के बीच सड़कों पर गड्ढों के कारण हुई मौतों का आंकड़ा दिखाता है कि अधिकारी सड़कों की देखरेख नहीं कर रहे हैं। न्यायालय ने शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश केएस राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति द्वारा दायर रिपोर्ट पर केंद्र से जवाब मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई अब जनवरी में होगी। आंकड़ों के मुताबिक 2013 से 2016 के बीच गड्ढों के कारण मध्यप्रदेश में 1244 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस अवधि में मप्र देश में तीसरे स्थान पर रहा। यूपी तथा महाराष्ट्र पहले व दूसरे स्थान पर रहे। 

गड्ढों के कारण हर दिन 10 लोगों की मौत

हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में इन गड्ढों ने 3,597 लोगों की जान ली है। यानी हर दिन 10 लोगों की मौत इन गड्ढों के कारण हुई है। यूं तो समान्य दिनों में लोगों को ये गड्ढे दिख जाते हैं और वह इनसे बचकर भी निकल जाते हैं। 

जिम्मेदारों पर चले हत्या का मुकदमा

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ रोहित बलुजा कहते हैं कि दुर्घटनाओं के लिए जो भी अधिकारी जिम्मेदार हैं उन पर लोगों की हत्या के मुकदमे करने चाहिए। 

बारिश के दिनों में होते हैं ज्यादा घातक

बारिश के दिनों में इनसे बच पाना नामुमकिन सा होता है। सड़कों पर पानी के निकास की उचित व्यवस्था न होने से इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिसके कारण सड़क के गड्ढे कई बार दिखाई नहीं पड़ते। अगर साल 2016 के आंकड़े देखें तो 2017 में यह आंकड़ा 50 फीसदी तक बढ़ गया है। 

गड्ढों से मौतों ने आतंकवाद को पीछे छोड़ा

अगर देश भर में इन गड्ढों से होने वाली मौतों की तुलना आतंकी घटनाओं से करें तो इस अवधि में आतंकी घटनाओं में 803 लोगों की जान गई है। इसमें आतंकवादी, सुरक्षाकर्मी और आम नागरिक तीनों ही शामिल हैं।

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